क्या कोई डर-निवारक वैक्सीन भी होता है?

किसको कोरोना हुआ, किसको नहीं हुआ?.. अब यह मसला नहीं रह गया! देर-सवेर सभी को इससे गुजरना है! पूरे भारत देश में मेडिकल व्यवस्था की दयनीय स्थिति के कारण वायरस के लोड से ज्यादा भय लोड हो चुका है! कोरोना ने पूरे देश में एक युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। कई परिवारों के ऊपर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा है जो लगातार लॉकडाउन के कारण दिन-प्रतिदिन और भी बढ़ता जा रहा है। मेरा अनुरोध है कि सभी एक दूसरे के संपर्क में बने रहें। बिना झिझक अपनी चीज़ें शेयर करें। डिजिटल दुनिया को अपनी जिंदगी में पूरी तरह से कदम रखने की अनुमति दें। यह अफरा-तफरी का वक्त भी गुजर जायेगा, दवा और ऑक्सीजन के अलावा, सच्ची सोच, साथ और हौसले की जरूरत है। यह याद रखें कि सकारात्मक विचारों से बड़ा कोई इम्यूनिटी बूस्टर नहीं है।

अफवाहों को सर ना चढ़ाएं! आपदा की बारिश में चारों ओर से आधे-अधूरे ज्ञान के मेंढक टर्राने लगते हैं। मुश्किल के समय में फ्री का ज्ञान बांटने से अच्छा है हम कुछ दर्द को बांटने या तो खत्म करने का प्रयास करें। सबसे पहले तो नेगेटिव और पैनिक चीज़ों को फैलाना बंद कर दें। किसी भी परिस्थिति में मनोबल कम न होने दें बल्कि दुसरों की हिम्मत बढाये, हर सम्भव मदद करें। हम सब एक विस्तृत परिवार हैं इसलिए एक दूसरे से बातचीत करते रहें। जो कुछ भी कर सकते हैं जरूर करें। अपने को खुशकिस्मत समझे की आप इस स्थिति में है जो दूसरों को एक नई जिंदगी देने में अपना कुछ तो योगदान दे पा रहें हैं।

ये डर कि 'कहीं मुझे कोरोना न हो जाए, कहीं इसे न हो जाए, कहीं उसे न हो जाए!'.. इन बातों से बाहर आ जाएं! क्योंकि डरपोक लोगों से युद्ध नहीं लड़ा जाता! जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई, रोग से जंग होती है.. क्योंकि इसमें आपके धैर्य, निडरता और मानसिक ताकत का वास्तविक परीक्षण होता है! आपने जिंदगी भर अपने जीवन को किस तरह व्यतीत किया हैं, यही बात रोग होने पर भी काम आती है। अगर आप आजीवन.. दुखी, निराश, अविश्वासी, संकुचित, कामी, क्रोधी, लालची और सशंकित होकर जिए हैं.. तो यही मनोभाव, रोग हो जाने पर गद्दार की तरह, शत्रु सेना का साथ देकर आपकी ताकत कम कर देते हैं! किंतु अगर आप जीवन में खुशमिजाज, निडर और पॉजिटिव रहे हैं.. तो यही मनोभाव संकट के बादलों को चीर कर निकलने की ताकत देता है! यानी आपकी ताकत को कई गुना ज्यादा बढ़ा देता हैं !

कोरोना पॉजिटिव होना यदि हमारे भीतर के सभी नेगेटिव विचारों को जला दे तो यह वरदान ही है अभिशाप नहीं! सारी धन-दौलत, गुरुर, घमंड और दिखावा धरे के धरे रह जाते हैं.. सबसे ज्यादा जरूरी है आपका और आपके अपनों का जिंदा रहना! कोरोना ने बता दिया कि जिंदगी में, जीवन से अधिक कीमती कुछ भी नहीं! शरीर की हर सांस जीवन की डोर को बचाए रखना चाहती है! आप बेशक मन से टूट जाएं मगर ये याद रखें कि आपका शरीर मरना नहीं चाहता! चाहे वो किसी भी आदमी या पशु / पक्षी की बात हो, इन सभी के शरीर की प्रत्येक कोशिका मृत्यु के खिलाफ संघर्ष करती है! अपने जीवन में करुणामय लाइफस्टाइल एवम सकारात्मक सोच को अपनाये जिससे आपके जीने का ढंग ही मुश्किल समय में कवच बनकर आपकी रक्षा करेगा। 

कोरोना एक मानव निर्मित बायोलॉजिकल वायरस है जो कि विश्व के आर्थिक स्पर्धा में हुई बेईमानियों के कारण तैयार किया गया था। इससे लड़ते हुए जिन्होंने अपनी जान गंवा दी, वे सभी योद्धा की तरह हैं। इनकी दिव्य आहुति एक करुणामय विश्व के निर्माण के लिए हम सबको अभिप्रेरित करती है! एक ऐसा विश्व जो सम्पूर्ण जनमानस औऱ पशु-पछियों के प्रति करुणामय हो, जो प्राकृतिक संसाधनों का दोहन न करें, जो बायो-डाइवर्सिटी और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखे...जो अनाक्रामक, प्रेम-पूर्ण और सृजनशील विश्व हो! अंत में यह कहूंगा कि इस महामारी में जिन्होंने अपनों को खोया है, उन सभी के पास..सभी की संवेदना और संबल पहुंचे! वे सब आगामी विश्व निर्माण के अग्रदूत हैं, उनके बलिदान को पूरी मानवता का नमन है!

☘️ वीगन सुदेश