गोबर से ‪‎गोइठा‬ बनते हैं, कोई घर के ‪चूलहे‬ में जलता हैं, कोई ....


गोबर से ‪#‎उपले‬ या ‪#‎गोइठा‬ बनते हैं, कोई घर के ‪#‎चूलहे‬ में जलता हैं, कोई ‪#‎शमसान‬ घाट में जलता हैं और कोई ‪#‎हवन‬-कुण्ड में, जलते तो सभी हैं पर, चूलहे में बने राख को भेंक देंते, शमसान की राख को कोई छूना भी नहीं चाहता हैं पर, ‪#‎हवनकुण्ड‬ की राख को ‪#‎हिन्दू‬ माथे पर लगाते हैं. 





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