अगर कोई ‪लड़की‬ घर से बाहर निकलती है, तो....


अगर कोई ‪#‎लड़की‬ घर से बाहर निकलती है, तो पुरुषो के प्रति इस तरह आभार प्रकट करती हैं जैसे उनके पिता, भाई या पति, ससुर ने उन पर ‪#‎अहसान‬ किया हो। अक्सर ‪#‎महिलाएं‬ कहती हैं - मैं कुछ नहीं कर पाती अगर मेरे पति, पिता ने मुझे घर से निकलने नहीं दिया होता। दरअसल इसमें महिलाओं की गलती भी नहीं है। अपनी ‪#‎सफलता‬, ‪#‎स्वतंत्रता‬ के लिए ऐसी कई लाइनें कहती नहीं थकतीं जबकि वे भूल जाती हैं कि स्त्री-पुरुष दोनों को समान अधिकार होता है। हम ‪#‎बचपन‬ से अपने आसपास जो देखते हैं, वही तो हम ‪#‎सीखते‬ हैं। उसी को ‪#‎सत्य‬ मानते हैं, बिना उसके आधार को जांचे-परखे, कभी ‪#‎धर्म‬ और कभी ‪#‎परंपरा‬ के नाम पर।


‪#‎फैशन‬ और टेक्नोलॉजी के मामले में हम ‪#‎भारतीय‬ अपने देश की तुलना और कॉपी हर बात में ‪#‎अमेरिका‬ से करते हैं, पर ‪#‎जेंडरइक्वलिटी‬ (‪#‎genderequality‬) में क्यों नहीं?? नयी टेक्नोलॉजी को उपयोग कर महिलाओं को MMS इंटरटेनमेंट मटेरियल बना कर रख दिया हैं तथा mms थ्रेट ने महिलाओं की असुरक्षा में इजाफा किया हैं. ‪#‎बॉलीवुड‬ ने भी ‪#‎लव‬-सेक्स-धोखा और ‪#‎रागिनीmms‬ जैसे फिल्मों के जरिये इसका दुरूपयोग किया हैं, इस से honour-killings, ‪#‎MMSscandals‬ जैसे क्राइम और भी बढ़ी हैं. महिला स्वतंत्रता विरोद्धी ‪#‎सेक्युलर‬, ‪#‎हिन्दू‬ और ‪#‎इस्लामिक‬ ‪#‎राजनीतिक‬ ‪#‎सोच‬ ने ‪#‎जेंडरजिहाद‬ न करके ‪#‎लवजिहाद‬ को अपने फायदे के लिए मीडिया के माध्यम से बेचा अभी तक!

आए दिन मीडिया में जोर-शोर से कहा जाता है कि लड़के और लड़की में कोई अंतर नहीं रहा। स्थिति वाकई बदली है और बदल रही है। लेकिन बदलाव उतना नहीं हुआ है, जितना बताया जा रहा है। भागीदारी अभी भी असामान्य हैं, जेंडर गैप और बढ़ रही हैं, सोशल मीडिया की तो बात कर्रे तो, लड़को ने लड़कियों के नाम से फेसबुक पर फेक प्रोफाइल (fake profile) बनाकर दूसरे लड़कों से बात करते हैं, इसी से सेक्स-रेश्यो का अंदाजा आप लगा सकते हैं, समाज की पुरुषवादी सोच थोड़ी कम जरूर हुई है पर महिलाओं की असुरक्षा पिछले कुछ समय में और भी बढ़ी ही है।

‪#‎सुदेश‬ ‪#‎कुमार‬

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