कोरोना काल में जिंदगी को बेहतर कैसे बनायें।


कोरोना काल में आपकी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए मेरे कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव - सुदेश कुमार

📌 1. लाकडाउन में अगर आपका मन बंजारे-सा भटकता रहता है तो इसे भी कुछ समय के लिए सपनों के क्वारिंटाईन में भिजवा दें। जितनी जल्दी हो सके अपने दिमाग में ये बात बैठा लें कि एक पूरी तरह से अलग स्थिति के लिए अनुकूल बनने का प्रयास करना है। इस महामारी के बाद दुनिया लगभग बदल सी गई है, इसलिए हम सबको भी बदलना होगा। जैसा कि डार्विन ने कहा था, ‘‘जो जीवित हैं, वे सबसे मजबूत या सबसे बुद्धिमान नहीं हैं बल्कि अपने पर्यावरण के सबसे अनुकूल हैं।"

📌 2. आपको डेवेलपमेंट के दृष्टिकोण को छोड़कर एक जिंदा रहने की मानसिकता पर खुद को केंद्रित करना होगा, जो आपके ध्यान को समाधानों पर केंद्रित करेगा और इस करोना के विश्वव्यापी आर्थिक कहर को झेलने में आपकी मदद करेगा। यह मानकर आगे चलिए कि आप इस नए बदले हुए वातावरण में अपने जिंदगी को फिर से शुरू कर रहे हैं। यह अपने आप में आपके नौकरी, बिज़नेस और इन्वेस्टमेंट के लिए एक नया अवसर प्रस्तुत करेगा।

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📌 3. ये समय घर में खाली बैठ कर टाइम पास करने का नही है। हम में से कुछ लोग घर से काम (wfh) नहीं कर रहे हैं? कोरोना संकट के कारण वो अपने घर पर हैं और अपना काम करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि हम इन दो अलग-अलग चीजों के बीच का अंतर को समझेंगे तो ही हम कुछ अच्छा कर पाएँगे।

📌 4. जरुरी चीज़ें अगर आपके पास जरूरत से ज़्यादा है तो इसका मतलब ये है कि आप डर और ग़ुरूर से जकड़े हुए हैं। आप सेनेटाईजेशन को अपनी ज़िंदगी पूरी तरह से अपनाये, लगे हाथ अपने ग़ुरूर को भी सेनेटाईज करवाएँ और डर से हमेशा के लिए छुटकारा पाएँ। नहीं तो नफरतों की नागफनी आपको एक बड़े आइसोलेशन तक ले कर जाएगी।

📌 5. शिक्षा हमें एक बेहतर दुनिया का अधिकार देती है। स्मार्ट फ़ोन उपयोग करके आप शिक्षा से वंचित नही रह सकते है क्योंकि डिजिटलिकरन की दुनिया में आज हमलोग तेज गति से एक फ्री एजुकेशन सिस्टम में प्रवेश कर रहे हैं। यदि आस-पास आस्थाओं के सौदागरों, उनके अंधभक्तों को दवा या वेंटीलेटर की जरूरत हो तो इन्हें मंदिर-मस्जिद-चर्च नहीं बल्कि एक अच्छे अस्पताल में भेजें और एक्सपर्ट से दिखाएँ।

📌 6. इंटरनेट पर भी सोशल  डिस्टेंसिंग का पालन करें, क्योंकि ये ज़्यादातर अनसोशल लोगों का बढ़ता व्यापार है। यहाँ गहराइयों में छिपे संबंध अब सूख रहे हैं। इन्हें किसी एलो-वेरा की रेसिपी या हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के वीडियो नहीं बल्कि प्यार और सम्मान चाहिए।

📌 7. वर्षों तक रामायण-महाभारत के झूठे ढोल पीटने वालों पर भी अब विश्वास न करें कि भारत कभी करप्शन-प्रधान देश नहीं था। दूर-दराज के इलाकों से बड़े-बड़े शहरों तक सरकार के भरपूर प्रयासों के बावजूद भी ब्लैकमार्केटिंग एवं कालाबाजारी के कभी नहीं रुकने वाले धंधे से अब परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि कुछ महीनों में यह व्हाट्सएप्प के जरिये एक देशी वालमार्ट का हिस्सा बनने जा रहा है।

📌 8. महामारी में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के साथ-साथ आजकल हमलोग प्रशासन और पुलिस के दुर्व्यवहार से भी एक बडी जंग लड़ रहे हैं। आप ऐसे समय में पुलिस के साथ समझदारी से निपटना सीखें, जो लोगों को बिना कुछ सुने-समझे धुनाई करना मात्र अपना कर्त्तव्य समझती है। इनकी ज़्यादा बुराई न करें क्योंकि ये हमारे समाज के ही प्रतिलिपि है, जैसी जनता, वैसी पुलिस। ये समय के साथ-साथ ख़ुद सुधरेंगे।

Vegan Sudesh   वीगन सुदेश   Vegan Sudesh 


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